
इंदौर प्लॉट धोखाधड़ी के एक मामले में विजयनगर पुलिस ने करीब 2 करोड़ रुपए के भूखंड के सौदे में 60 लाख रुपए की बयाना राशि वापस नहीं करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, व्यापारी ने प्लॉट के सौदे के लिए यह रकम दी थी। सौदा करने वाले व्यक्ति की मौत के बाद उसके बेटे ने रकम ब्याज सहित लौटाने की बात कही, लेकिन आरोप है कि बाद में राशि वापस नहीं की गई।
विजयनगर पुलिस ने दर्ज किया धोखाधड़ी का मामला
विजयनगर पुलिस ने सुनील चौकसे की शिकायत पर पंकज पुत्र भेरूलाल पोरवाल, निवासी उषानगर एक्सटेंशन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
पुलिस शिकायत के मुताबिक, मामला इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना से जुड़े एक भूखंड के सौदे से संबंधित है। प्लॉट की कीमत करीब 2 करोड़ रुपए बताई गई है।
इंदौर प्लॉट धोखाधड़ी में 60 लाख रुपए का बयाना
पुलिस के मुताबिक पंकज के पिता भेरूलाल ने सुनील चौकसे से इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना के एक प्लॉट का सौदा किया था। अक्टूबर 2024 में दोनों पक्षों के बीच अनुबंध हुआ था।
सौदे के तहत सुनील चौकसे की ओर से कुल 60 लाख रुपए बयाना राशि के रूप में दिए गए। इसमें 50 लाख रुपए चेक के माध्यम से और 10 लाख रुपए नकद दिए जाने की बात सामने आई है।
रजिस्ट्री के समय देना थी बाकी रकम
अनुबंध के अनुसार प्लॉट की शेष राशि रजिस्ट्री के समय देने की बात तय हुई थी। इसके लिए लक्ष्मण नगर गृह निर्माण संस्था का फॉर्म भी भरवाया गया था।
अनुबंध होने के करीब चार महीने बाद भेरूलाल का निधन हो गया। इसके बाद भूखंड की रजिस्ट्री और बाकी भुगतान की प्रक्रिया अटक गई।
पिता की मौत के बाद बेटे से हुआ नया अनुबंध
शिकायत के मुताबिक, भेरूलाल के निधन के बाद उनके बेटे पंकज से भूखंड की रजिस्ट्री और आवंटन को लेकर बातचीत हुई। आरोप है कि रजिस्ट्री और भूखंड आवंटन को लेकर मामला लगातार टलता रहा।
इसके बाद मार्च 2026 में पंकज के साथ नया अनुबंध किया गया। इसमें भूखंड आवंटन और बयाना राशि वापस करने से जुड़ी शर्त तय की गई।
तीन महीने में प्लॉट नहीं मिला तो रकम लौटाने की बात
नए अनुबंध में कथित तौर पर तय हुआ कि तीन महीने के भीतर भूखंड का आवंटन नहीं होने पर 60 लाख रुपए की बयाना राशि 2 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस की जाएगी।
हालांकि, शिकायत के अनुसार तीन महीने की अवधि पूरी होने के बाद भी न तो भूखंड का आवंटन कराया गया और न ही 60 लाख रुपए की बयाना राशि वापस की गई।
2 प्रतिशत ब्याज के साथ रकम लौटाने का था दावा
शिकायतकर्ता का आरोप है कि समझौते के मुताबिक बयाना राशि 2 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाई जानी थी। निर्धारित अवधि बीतने के बाद रकम नहीं मिलने पर मामला पुलिस तक पहुंचा।
DCP जोन-2 को दी गई लिखित शिकायत
राशि वापस नहीं मिलने के बाद सुनील चौकसे ने डीसीपी जोन-2 को लिखित शिकायत दी। शिकायत में प्लॉट के सौदे, दिए गए 60 लाख रुपए और बाद में हुए अनुबंध की जानकारी दी गई।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच की। इसके बाद विजयनगर थाने में पंकज पोरवाल के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई।
इंदौर प्लॉट धोखाधड़ी मामले की जांच शुरू
इंदौर प्लॉट धोखाधड़ी मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद विजयनगर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब प्लॉट के सौदे से जुड़े अनुबंध, भुगतान और अन्य दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
FAQ
इंदौर प्लॉट धोखाधड़ी का मामला कितनी रकम का है?
प्लॉट की कीमत करीब 2 करोड़ रुपए बताई गई है, जबकि शिकायत में 60 लाख रुपए की बयाना राशि वापस नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
60 लाख रुपए का भुगतान कैसे किया गया था?
पुलिस के मुताबिक, 50 लाख रुपए चेक और 10 लाख रुपए नकद बयाना राशि के रूप में दिए गए थे।
किस पुलिस थाने में FIR दर्ज हुई?
इस मामले में इंदौर की विजयनगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।
आरोपी कौन है?
पुलिस ने शिकायत के आधार पर पंकज पुत्र भेरूलाल पोरवाल के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।
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