
मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष रतलाम दौरे पर सोमवार को पहुंचे। मध्यप्रदेश राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई कर नागरिकों की समस्याएं सुनीं। इसके बाद सर्किट हाउस में मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने Gen Z और Alpha Generation को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन बात कहने का तरीका शालीन और मर्यादा के भीतर होना चाहिए।
डॉ. सिंह ने कहा कि समय लगातार बदल रहा है और लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। वर्तमान दौर में Gen Z और Alpha का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। कई बार कुछ लोगों में अतिजागरूकता भी देखने को मिलती है। युवाओं की बात शासन, प्रशासन और सरकार को सुननी चाहिए।
Gen Z और Alpha को लेकर क्या बोले आयोग अध्यक्ष?
डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति बड़ों का सम्मान करते हुए अपनी बात रखने की सीख देती है। युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है और उनकी बात सुनी भी जानी चाहिए।
उन्होंने युवाओं से अपनी बात शालीनता और मर्यादा के दायरे में रखने की बात कही। उनका कहना था कि जागरूक होना अच्छी बात है, लेकिन संवाद का तरीका भी महत्वपूर्ण है।
मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष रतलाम में जनसुनवाई में हुए शामिल
मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष रतलाम कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में भी शामिल हुए। यहां उन्होंने नागरिकों से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई की और संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत को प्राथमिकता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाए। नागरिकों की पूरी बात समझने के बाद नियमों के अनुसार जल्द से जल्द निराकरण करने का प्रयास किया जाए।
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि प्रत्येक नागरिक के मानव अधिकारों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी भी शिकायत पर कार्रवाई करते समय मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
25 मामलों की समीक्षा, पुलिस विभाग के 11 प्रकरण
आयोग के सामने रतलाम जिले से जुड़े कुल 25 प्रकरणों की प्रकरणवार समीक्षा की गई। इनमें सबसे अधिक 11 मामले पुलिस विभाग से संबंधित बताए गए।
आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों से पूछा कि इन मामलों में अभी तक क्या कार्रवाई की गई है। अधिकारियों द्वारा प्रकरणों की वर्तमान स्थिति और की गई कार्रवाई की जानकारी आयोग के सामने रखी गई।
इसके अलावा जनसुनवाई के दौरान सामने आए नए मामलों को भी आयोग ने संज्ञान में लिया।
इलाज से लेकर भर्ती तक की शिकायतों पर सुनवाई
जनसुनवाई में कई अलग-अलग तरह की शिकायतें सामने आईं। इनमें गैस नली से लीकेज, मेडिकल कॉलेज में आदिवासी महिला के उपचार से जुड़ी शिकायत, महिला एवं बाल विकास विभाग में कर्मचारी का वेतन रोके जाने और नगर निगम में दिव्यांग भर्ती से जुड़े मामले शामिल रहे।
स्वास्थ्य विभाग में उपचार के दौरान कथित लापरवाही, जीवन निर्वाह और टीकाकरण से संबंधित मामलों पर भी सुनवाई हुई।
मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष रतलाम में सामने आई इन शिकायतों को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों से जानकारी ली और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।
जावरा स्कूल मामले में जांच कमेटी बनाने के निर्देश
जावरा के एक उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्टाफ रूम समय पर नहीं खोले जाने से जुड़ा मामला भी जनसुनवाई में सामने आया। आयोग अध्यक्ष ने इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि विद्यालय में बच्चों के लिए बेहतर और सकारात्मक वातावरण होना जरूरी है। बच्चों का भविष्य महत्वपूर्ण है, इसलिए स्कूल की व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही गई।
गुमशुदगी, हत्या और अन्य गंभीर मामलों की समीक्षा
जनसुनवाई के दौरान बालक की गुमशुदगी, हत्या, दुष्कर्म और भूमि पर अधिकार दिलाने जैसे मामलों की भी समीक्षा की गई।
इसके अलावा ताजिए के दौरान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से लोगों की मौत से संबंधित मामले सहित अन्य शिकायतों पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों को संवेदनशीलता से शिकायत सुनने के निर्देश
मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष रतलाम दौरे के दौरान डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने अधिकारियों से कहा कि नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। शिकायतकर्ता की पूरी बात सुनने के बाद उसकी समस्या के समाधान का हर संभव प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने मानव अधिकारों की सुरक्षा को आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई के दौरान मानवीय दृष्टिकोण का ध्यान रखा जाना जरूरी है।
जनसुनवाई के दौरान डीआईजी निमिष अग्रवाल, एसपी अमित कुमार, जिला पंचायत सीईओ वैशाली जैन, अपर कलेक्टर बृजेंद्र रावत, नगर निगम आयुक्त अनिल भाना और एएसपी विवेक कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
FAQ
मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष रतलाम क्यों पहुंचे?
डॉ. अवधेश प्रताप सिंह रतलाम में जनसुनवाई और जिले से जुड़े मानव अधिकार मामलों की समीक्षा के लिए पहुंचे थे।
Gen Z को लेकर डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन बात रखने का तरीका शालीन और मर्यादा के भीतर होना चाहिए।
रतलाम में कितने मामलों की समीक्षा की गई?
मानव अधिकार आयोग के सामने रतलाम जिले से संबंधित कुल 25 प्रकरणों की समीक्षा की गई। इनमें 11 मामले पुलिस विभाग से जुड़े थे।
जावरा स्कूल मामले में क्या निर्देश दिए गए?
आयोग अध्यक्ष ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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